बचन वेश क्यां जानिए मनमलीन नर नारी,
सुपनखा र्मुग पुतना दस मुखी प्रमुख विचारी।
तुलसीदास जी कहते हैं किसी भी मनुष्य की पहचान इस आधार पर नहीं की जा सकती की उसकी बोली मीठी और पोशाक सुंदर है,
बहारी आडंबर से आकर्षित होकर यह कहना मुश्किल है की वह व्यक्ति सज्जन है या दिमाग से दुष्ट,
क्योंकि शुर्पणखा,मरीची,राक्षसी पुतना और दस मुखी रावण के परिधान और वाणी दोनों ही बहार से सुँदर थे लेकीन मन अंदर से गंदा था,
यह उदाहरण विचारणीय है।
"जय श्रीराम"