तमस से लड़ रहा
--------------------
जल रहा है आस बनकर ,दे रहा सबको निमंत्रण
मत नकारो तुम किसीको ,है ये जीवन सबसे सीखो
कोई न परिपूर्ण होता ,ज्ञान का भंडार सबमें
तुम नहीं देखो विवशता ,देखो लो विश्वास भर तुम
वो तमस से लड़ रहा है, जूझता, पर जल रहा है
मार्ग कितने हों अँधेरे ,और भय मन को हो घेरे
वो कभी न हारता है ,वो सदा ललकारता है
आस बन विश्वास बनकर सबके वो आगे खड़ा है
लौ ज़रा सी रह गई पर ,पीड़ा सबकी ओढ़ता है
रह स्वयं अँधियार में सबको उजाले भेजता है
अश्रु उसके नयन में हैं ,किन्तु न दर्शा रहा है
देखकर सबकी विवशता ,वो तमस से लड़ रहा है |
डॉ.प्रणव भारती