समय चक्र पर चढ़कर चलना सबकी नियति है
हम चाहें तो भी रुकना आसान नहीं है ।
करणीय जिनको काम नहीं है
फिर भी जिन्हें आराम नहीं है
सबल के सामने दाँत निपोरें
निर्बल को क्षमा दान नहीं है
अहम् पालना उनकी रति है ।
वे टूटते हैं , झुकना उनका आसान नहीं है ।।
समय चक्र पर चढ़कर चलना सबकी नियति है ।
हम चाहें तो भी रुकना आसान नहीं है ।।
मेरे मन मस्ती में झूम ले
धरती और आकाश चूम ले
हर क्षण कण-कण में प्रभु का वास है
तू बिंदास ब्रह्माण्ड घूम ले
उसी का लाभ , उसी की क्षति है
ऊपर वाले से लड़ना आसान नहीं है ।
समय चक्र पर चढ़कर चलना हम सबकी नियति है ।
हम चाहें तो भी रुकना आसान नहीं है ।।
साँसों की सुँई दौड़ रही है
सब कुछ पीछे छोड़ रही है
सांसारिक वल्गाएँ नित ही
नये-नये रिश्ते जोड़ रही हैं
पंच तत्व में मिलना अपनी अंत गति है,
फिर भी मोह-पाश से बच पाना आसान नहीं है ।
समय चक्र पर चढ़कर चलना सबकी नियति है ,
हम चाहें तो भी रुकना का आसान नहीं है।।