जिस प्रकार मां-बाप के लिए बच्चे कभी बड़े नहीं होते,हमेसा बच्चे ही रहते, उसी प्रकार हर बच्चा अपने बाप को कभी बूढ़ा नहीं होने देता।बच्चों की उपलब्धियों से बाप के चहरे पर का चमक सदैव उसे जवान बनाये रखता है। हर वो बच्चा धन्य है जो पिता को प्रसन्न रखता है। हमारी संस्कृति में कृतज्ञता का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। पितृ ऋण और गुरु ऋण उसी प्रकार का एक ऋण है।
गीता में भगवान कृष्ण ख़ुद को पूरे ब्राह्मण का पिता कहते हैं,वहीं भगवान कृष्ण हर इंसान के रूप में,पिता के रूप में पृथ्वी पर जन्म लेकर संतानों का पालन करते हैं।धन्य हैं हम जो ऐसे महान व्यक्तिव के छायातले जीवन व्यतीत कर रहे हैं।