PROFESSION कुछ भी हो , अन्तर कहाँ है
उस राजा के बिना रंक कहाँ, और रंक बिन राजा कहाँ है
दुनिया चाहे कुछ भी कहे, तुम खुद की सुनो
न दिखने वाली हवा भी ज़रूरी है, उसके बिना सांसें कहाँ है।
आंकोगे गर कार्य से, गलती ज़रूर होगी
आंकोगे गर कर्म से, सच्ची परख होगी
पैमाना ये नजरों का छोड़ दे ऐ मुसाफिर
अंधेरे में छिपे सूरज के बिना, वो खूबसूरत चांद कहाँ है ।
यहाँ हर कोई #अद्वितीय #Unique है