बोहोत बाते करने वाले खामोश हो जाये
तो चुपी खलती है ||
बोहोत फिकर करने वाले बेफिक्र हो जाये
तो बेरुखी खलती है |||
किसीकी सबसे ज्यादा ज़रूरत हो और वोह पास ना हो
तो उसकी गैर मजूदगी खलती है ||||
किसी पर पूरा ऐतबार हो
तो उसका बदल जाना खलता है ||||
किसीको मरहम समझ् बेठो
तो उसका जख्म देना खलता है
उम्मीद भीड़ की हो और कोई साथ ना दे
तो तन्हाई खलती है |||||