#Rebellious is an Art..!!!
My Meaningful Poem..!!!
हाँ ग़लतफ़हमी में हम सबको रहन दो
जी परमेश्वरजी देखत है सुनत हैं हमें
ख़्याल यह लाजवाब है जानत हर कोई
सब है समजत भी दिल से उसूल से पर
मानत तो मानत कुछ ओर ही, है ख़्याल
यह गर देता है सूकुन तो देने ही दो ना
हाँ ग़लतफ़हमी में हम सबको रहन दो
प्रभु उपर बैठ अच्छे बूरे हमरे सब अम्ल
देखत पल पल हमरे हर कमँ जानत है
बोलत ना ही पर सुनत सभी भले-बूरे
कटुवचन एवम् मधुरवाणी,प्रभु प्रभु है
हाँ ग़लतफ़हमी में हम सबको रहन दो
प्रभु की पहुँच-ओ-द्रष्टव्य अपरंपार है
नादान फ़ानी बंदे समजत सब परखत
प्रभु तक को चादर फ़ुल नारियल 🥥
पर जीवनरेखा कर के अनदेखा मँगते
प्राण-आयुष्य-वर्धन सदा सुखी-संपन्न
हानिकारकता-रहित जीवन-फ़ल-पूँजी
हाँ यही ग़लतफ़हमीमें हम सबको रहन दो
कोरोना से भीड़तं भीड़ो ना बहुत चालक
बने फिरते थे ग्रहोंको बसमें किए फिरते
इन्सानियतकी ख़ून🩸रेंजी किए फिरते
प्रभु को ताख़-ओ-चौखटोंमेँ समजते थे
हाँ यही ग़लतफ़हमीमें हम सबको रहने दो
✍️🥀🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🥀✍️