"इच्छा" अपने परिवार के प्रति समर्पित , समाजिक मान्यताओं मे बँधी अपने बदलाव के महत्वपूर्ण चरण मे प्रवेश करने जा रही है | कहीं कहीं पर मैने इच्छा के साथ भावहीन बर्ताव किया , जिसकी पोल शब्दो ने खोल दी है पर जल्दी ही मुझे अपनी गल्ती का अहसास हुआ मै क्षमा प्रार्थी हूँ अपनी उस गल्ती के लिए | आपसब पाठको का प्रेम ही मेरी उर्जा और पसन्द ही मेरी ताकत है , मै कोई कवयित्री या लेखिका कहलाने योग्य तो नही हूँ , किन्तु उनकी विशिष्टता के चरण बिन्दु को यदि छू भर पायी तो खुद को श्रेष्ठ समझूँगी | परिवर्तन कई चुनौतियों को दावत देता है इन चुनौतियों के बीच वह खुद को किस प्रकार निकाल पाती है , यह परिवर्तन उसे कहाँ तक ले जाता है, यह जानने के लिए इसके आने वाले भाग को पढ़ते रहिये | वहीं नये पाठको से अनुरोध भी कि ,वह इच्छा को समझने उससे परिचित होने के लिए उसके पिछले अंको को जरूर पढ़े | साथ ही आप सभी से अनुरोध है कि आप केवल तारीफ नही बल्कि उचित आलोचना से भी इसे पूर्ण करे | ताकि आपकी रूचियों के अनुरूप मै इसमे प्रयोग या परिवर्तन कर सकूँ | धन्यवाद🙏
Ruchi Dixit लिखित कहानी "इच्छा - 10" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19886296/ichchha-10