अनजाने सफर पे, अनजानी डगर पे,
तन्हा अकेले चले जा रहे हैं..
खुद में बदलते, खुद से ही मिलते,
हर पल जैसे, संवरते जा रहे हैं..
अकेले ही बढ़ती है, अल्हड़ सी नदिया,
प्रियतम से मिलने, सागर में मिलने,
हम भी अकेले, चले जा रहे हैं,
तन्हा सफर में, मंज़िल से मिलने..!!
-Richa Agarwal(Chiraiya)