#दरिद्र
धर्म के प्रभाव में अधर्म कितना बढ़ रहा
मनुष्यता गिरी धरा मनुष्य नभ में चढ़ रहा
कृपानिधान भक्ति में भक्त भक्ति गढ़ रहा
मनुष्यता को भंग कर मनुष्य ग्रंथ पढ़ रहा
धर्म के प्रभाव में अधर्म कितना बढ़ रहा
मनुष्यता गिरी धरा मनुष्य नभ में चढ़ रहा
विश्वास मात्र शब्द रहा विश्वास आज हार गया
मनुष्य जानवर बना जानवर को मार गया
क्या सुनेंगी पीढ़ियां मनुष्य बम को मढ़ रहा
मनुष्यता गिरी धरा मनुष्य नभ में चढ़ रहा
मनुष्यता की आड़ में दरिद्र की दरिद्रता मिले
काले मन के भाव में धर्म छिद्रता मिले
काले मन का आदमी धर्म ज्ञान पढ़ रहा
मनुष्यता गिरी धरा मनुष्य नभ में चढ़ रहा
।। ज्योति प्रकाश राय ।।