अभी 'बचपन' में ही तो सिखाया था,
कैसे एक 'जानवर', "इंसान" बन पाया था,
लड़कपन तक तो 'रटा' रहा,
'जवानी' आई सब भूल गया।
भूल गया कि मानवता से ही मानव है,
भूल गया कि दया बिना तू दानव है,
वैसे तो बड़ी ज्ञान की बातें तू बोलता है,
पर बुरा न मानना..
कुछ चंद पलों कि खुशी के लिए, किसी के जीवन से तू खेलता है,
अपनी इज़्ज़त पर तो एक आँच भी गवारा नहीं,
पर दूसरे की अस्मत पर नजरें हमेशा फेरता है।
भगवान का रूप हैं बच्चे, कहा-सुना कई बार होगा,
नारी ही देवी है, इन जयकारों से गूंजा सारा संसार होगा,
कहने को तो पशु-पक्षी भी पूजे जाते हैं यहाँ,
पर प्रताड़ित करने से पहले, सोचा ना कुछ एक बार होगा।
देश-धर्म की बातें, जग को खूब सुनाई हैं,
हर साल उस 'एक' दिन के लिए, "स्टोरी" भी लगवाई हैं,
क्या हो तुम असल में, 'उस एक दिन' खुद से बस ये पूछो,
खैर छोड़ो क्या फायदा ..
मानव विकास के क्रम में, ये सब बातें कहाँ बताई हैं ।