या ख़ुदा तेरी ख़ुदाई,
एक भी उम्मीद ना दिखाई,
सजदे मे हमने उनकीं जिंदगी सजाई,
जिसे महोब्बत हुई उसी से क्यूँ कराई रुसवाई,
जिसे अपना समझा मैंने उसी से क्यूँ कराई जुदाई,
क्यूँ कराई अकेलेपन से रिहाई,
जब करनी ही थी बेवफाई,
अब मेरी वफ़ा का कोंन देगा गवाही,
या ख़ुदा तेरी ख़ुदाई,
एक भी उम्मीद ना दिखाई।
#सजावट