तुम तो दामन झटककर आगे बढ़ गए,
मैं आज भी वहीं ख़ड़ी हूं
अपने सपनों के कब्रिस्तान में
अपनी टूटी ख्वाहिशों के मज़ार पर,
आँखों में आँसू भरे सोचती हूँ
क्या मेरी खता थी तुम्हें प्यार करना,
तुम पर आँख मूंदकर यकीन करना,
मैंने अपना जीवन लगा दिया
तुम्हारे घर को सँवारने में,
तुम्हारे रिश्तों को संभालने में,
तुमने जरा देर में खत्म कर दिया
हमारा रिश्ता, मेरा वजूद,
पुरानी यादों की लाश को दफनाकर
अब हिम्मत जुटाकर मुझे उठना है,
सम्भलना है और आगे बढ़ना है।
#आगे