क्यू
कहते थे ने तुम माँ से ....??
अबकी बार जाऊँगा
तो वापस घर न आऊंगा ....
अब आगयी न याद ...
तरप गए न दिल तुम्हारे ...
हो गए न बेचैंन ...
हो गयी तस्सली ...
हो गयी तम्मना शहार जाने की ....
बन गये न खुद की नजर मे कामयाब ...
सच सच बताना पलके तो अब झुकती होगी ...
दिल मे एक कशिस होगी तरप होगी ...
सुनो न अब जब भी घर आना तो ...
उस विरान शहर की सारी य़ादे...
गाव वाले पुरानी विशाल वृक्ष...
के समिप जो चौराहा ह न ...
वही अपने य़ादों को पिरोह देना .....
तुम कब तक माँ की ममता को ....
अपने खुशियों के अंधेरे से रौंधोगे ...??
##Lockdown
##घर की य़ादें ...