-क्या तुम आओगे-
जब जीवन नीरस बन जाये
कोई राह न मुझको
दिखलाए
उन कठिन क्षणों में क्या मुझको तुम
पथ मेरा दिखलाओगे
क्या तुम आओगे!!
आंखों से अश्रु की धार बहे,
और हृदय टूट चीत्कार उठे
उस पल आकर क्या साथी तुम
मुझे गले से अपने लगाओगे
क्या तुम आओगे!!
जब पैर में मेरी छाले हों
और राह में कांटे डाले हो
ए-मीत मेरे सच सच बोलो
क्या पथ में फूल बिछाओगे
क्या तुम आओगे!!
जब दुनियाँ मेरी लुटने लगे
मेरा गम ही मुझ पर हँसने लगे
उस पल क्या मेरे
होंठो पर तुम गीत खुशी के लाओगे
क्या तुम आओगे!!
जब साथी न मेरा कोई हो
और मंजिल मेरी खोई हो
तब हाथ थामकर हाथों में
मुझे घर तक छोड़ के आओगे
क्या तुम आओगे!!
जब सांसें मेरी थमने लगे
और आंखें बोझिल होने लगे
उस पल अपने इन कांधों का
क्या सिरहाना दे पाओगे
क्या तुम आओगे!!
क्या तुम आओगे!!