अकेला हु पर अपनी भी एक दुनिया हे,
जो ढेर सारे गमों से भरी एक दुनिया हे,
ना खुशी की पहेचान हे ना मुस्कान की कोई गुंजाइश,
ना प्यार का कोइ ज़िक्र हे ना महोब्बत की कोई नुमाईश,
अकेला हु पर अपनी भी एक दुनिया हे,
जो ढेर सारे गमों से भरी एक दुनिया हे,
ना कभी आंसु सुखे हे ना कभी आंसू रुके हे,
ना कभी प्यार को महसूस कीया हे ना कभी पाया हे,
अकेला हु पर अपनी भी एक दुनिया हे,
जो ढेर सारे गमों से भरी एक दुनिया हे,
ना कोई आंसूओ को पोंछने वाला हे ना कोई आंसूओ को समजने वाला हे,
ना कोई गमों को मीटाने वाला हे ना कोई गमों से उभारने वाला हे,
अकेला हु पर अपनी भी एक दुनिया हे,
जो ढेर सारे गमों से भरी एक दुनिया हे,
ना कोई हाथ थामने वाला हे ना कोई गम मे साथ निभाने वाला हे,
ना कोई मंजीले हे और ना हि कोइ राहे हे बस यहि मेरा आखिरी सफ़रनामा हे,
अकेला हु पर अपनी भी एक दुनिया हे,
जो ढेर सारे गमों से भरी एक दुनिया हे,