में सांवली सी लड़की
रहती हुँ सहमिसि चुपचाप, दिल का दर्द मुस्कान
में छुपाती अपनी ही दुनिया में सिमटी ||
छू नहीं पाती हुँ किसी की रूह को अपने सादगी से,
अच्छी सूरत के पीछे सब भागे,
अच्छी सीरत को पूछे कौन ??
मुझे अधिकार नहीं सपने देखने का
ये कहना मेरे रंग पे हसने वालों का है
मुझे लेकर उनके अतरंगी खयालो का है |||
में सांवली सी लड़की, थोडी सी नींद के लिए
खुद को रुला देती हुँ, अंगड़ाई लेती इच्छाओं को
चुप कर के सुलादेति हुँ ||||
बात होती है मेरी फूटी किस्मत की
में अधूरी सी एक चाँद हुँ
जिसको इंतेज़ार है पूनम की रात की |||||