तुम बैठे हो क्यों उदास, जरा मुस्कुराओ न
जिसकी है तुम्हे आस, उसको बुलाओ न
शरारती वो हरकतें, थमती नहीं थीं जो
मोहक सी अदाएं वो, फिर से दिखाओ न
नाता है शरारतों का, बच्चों से इस कदर
ज्यों सांस का जीवन से, रिश्ता है उम्र भर
बेदाग और निश्छल, मोहिनी है शरारत
दीदार रब का होता, बच्चों के अक्स में
दिल रोए जार - जार, बचपन को याद कर
सज़ा सा लगे जीवन, बचपन के बाद का
शरारती हसीन लमहे, याद आएं बार - बार
लौट आएं बीते दिन वो, दिल चाहे बार - बार
#शरारती