#भाग्य
....हम मनुष्य पैदा होते हैं,
एक कोरे कागज की तरह,
स्वतंत्रता है,
कुछ भी लिखने को,
जैसी लकीर खींची जाए,
खींचने वाले भी हम,
मिटाने वाले भी हम,
मतलब "भाग्य" नहीं,
जो जाग गया,
उसके लिए नहीं,
यही गरिमा है मनुष्य होने की,
वही ऐक्टर,
वही डायरेक्टर,
वही विलेन,
करुनेश कंचन