असीम ग्लानि और आत्म प्रताड़ना की तीव्र ज्वाला में पूरी
रात जलता रहा,पिछले दिनों की कई स्मृतियां पूरी रात परेशान करती रही एक क्षण का आराम भी असह्य हो चुका है मेरे अंतर्मन ने मुझे उस दारुण अतीत में ले जाकर पटक दिया है जहां व्यथातुर स्मृतियां के धुएं के गोले उठ उठ कर चोट करते है;)