हरियाणवी मे एक कहावत हो रखी हे,इब तने मे समझाऊँ
भीतर को ना रख्या कुछ,
भीतर की बाता ते रामजी जाणे,
कुछ साला बाद सब का नष्ट होना हे,
जो भी दबाके रख्या से,
नीकाण दे उसने बाहर,
अच्छा लगेगा तो लोगा के काम आवे ते ना जम्या तो अपणे आप हि समजले,
बडि बात हे,थोडा ध्यान दोगें इब तने भी समज मे आ जावेगा लाले।