वीणापाणि नमन है तुमको, मेरे कंठ में कर लो वास।
हमें प्रकाश ज्ञान का दो मां, निमिष में संशय कर दो नाश।।
हे विघ्न विनाशी,गणनायक,गौरीसुत मुझ पर दृष्टि करो।
न फूले फसल कभी तम की,ऐसी प्रकाश की वृष्टि करो।।
भारत वीरों की वसुधा बन,दस दिशि में सुयश कमाता है।वह रवि बनकर सारे जग में,अपना प्रकाश फैलाता है।।
युगों-युगों से किया प्रकाशित, इस धरा को अपने ज्ञान से।
विश्व गुरू कहलाये जगत में,गोद हमें मिली भगवान से।।
ध्रुव, नचिकेता तो बालक थे, फिर भी दुनिया को दिखा दिया।
कोई काम न दुर्लभ हमको, यह सबक सभी को सिखा दिया।।
#प्रकाश