Hindi Quote in Thought by Vinay Panwar

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पलायन
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बचपन से देखते आ रहें है मार्च अप्रैल में लगभग सभी मजदूर अपने गांव लौटने की कवायद में लग जाते थे। हमारे खेतों में काम करने वाले साथ ही हमारी भैसों के लिए एक पूर्वोत्तरी सदैव 10 महीने हमारे घर मे और 2 महीने अपने गाँव मे रहता था।
लगभग 26 साल से घरेलू मदद के लिए एक अदद मददगार रही है जो हर साल मार्च अप्रैल में अपने गाँव चली जाती थी। अब भी पिछले तीन सालों की पोस्ट जिन्हें जुकरबर्ग जी मेमोरी में दिखा रहे हैं कामवाली की अनुपस्थिति से त्रस्त विनय के दर्द को बयां करने वाली ही हैं।
हर साल यातायात सुलभ होने की वजह से इनका अपने प्रदेश को पलायन किसी की नज़रों में नही चढ़ता था वह सिर्फ रेलवे के आंकड़ों में दर्ज होता था।
अब भी अधिकतर मजदूर तालाबंदी में बस इसलिए गाँव की और भाग रहे हैं कि जब तक खाली हैं गाँव हो आते हैं जब काम खुलेगा लौट आएंगे और वैसे भी हर साल तो जाते ही है।
सभी की सोच एक बराबर काम कर रही है कि घर से निकलो तो सरकार अपने आप घर पहुँचाएगी।
सभी के खाते में पहले से भी पैसे थे और प्रधानमंत्री जी की सहायता घोषणा के बाद भी लगातार पहुँच रहे हैं।
#विशेष ---- यह बात यूँ ही नही कह रही, पिछले तीन सालों से हमारे साथ काम कर रही अपनी हाउसहेल्प से बात करने पर कह रही हूँ जो तालाबंदी में अपने गाँव मे फंस गई जबकि उसका पूरा परिवार दिल्ली में ही है । जो लोग गाँव पहुँच रहे हैं उन्ही की बयानबाजी सुनकर उसने फोन पर बताया।
इतना ही नही दिल्ली, बहादुरगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम, मुम्बई, बंगलौर, हैदराबाद, बड़ौदा में रह रही अपनी लगभग 20 से अधिक सखियों से इस बाबत बात हुई जिसमें मजदूर वर्ग की इसी सच्चाई की पुष्टि हुई। सभी ने इनको रुकने की सलाह दी जो नही मानी गयी। एक बात गौरतलब है कि लगभग सभी को किसी न किसी तरीके से यह संदेश पहुँचा है कि बाहर निकलो, सत्ताधारी पार्टी घर पहुँचाएगी।
ये हर साल घर लौटते हैं लेकिन इस बार दिमाग ही नही लगाया कि कैसे पहुचेंगे बस जैसे भड़काया गया निकल पड़े। मीडिया की नज़र बस इस साल ही इन पर पडी। मीडिया ने और काम किया कि सड़क पर चलने वाला हर बन्दा उन्हें मजदूर दिखाई दिया भले ही वह किसी भी पद पर कार्यरत रहा हो।
इसका अर्थ यह है कि कुछ घटक ऐसे जिन्होंने सरकार की मुश्किलें बढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ी।
सड़क पर दौड़ते मजदूरों को देखकर हमें भी दुख होता है लेकिन क्या कर सकते हैं। जरा तो दिमाग से काम लेते तो शायद स्थिति कुछ और होती।

रही बात सरकार को या प्रधानमंत्री जी को अपने समर्थन की तो पार्टी या व्यक्ति विशेष को समर्थक नही, मेरे देश के प्रति देशहित में जो काम करे उस हर व्यक्ति को हमारा समर्थन सदैव रहेगा।



विनय...दिल से बस यूँ ही

Hindi Thought by Vinay Panwar : 111443792
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