नज़र ने नज़र से नज़र जब मिलाई है
नज़र ने नज़र से नज़र पे तीर चलाई है
नज़र से नज़र का बार नज़र पे हुआ है
देखो नज़र वालो तुम्हें कुछ नज़र क्या आई है
ये नज़र के नजारे बड़े हिं है नज़र बन्द
जब नज़रों से चले हैं तो दिल पे क्यों आई है
सम्हालो नज़र वालो नज़रों को अपने
नज़र ने ये देखो मेरी क्या हालत बनाई है
नज़र जबसे मिली है नज़रों से तुम्हारे तो
नज़र मेरी नजरों को कुछ भी न आई है
नज़र की नजाकत को नज़र वाले देखो
नज़र अब नज़र हि नज़र में शरमाई है
प्रदीप तेरी नजरों को हुआ है यूं कुछ की
नज़र हि नज़र ही में उसकी सूरत समाई है