जब भी mother's day मनाया करो
थोड़ी देर बृद्धाश्रम मैं घूम आया करो ||
जब भी valentine day मनाया करो
थोड़ी देर हॉस्पिटल मैं एसिड अटैक से जूझती
किसी लड़की की आह सुन आया करो |||
जब भी women's day मनाया करो
स्त्री शिक्षा की रीढ़, साबित्री बाई फुले को
स्मरण किया करो |||||
या फिर ये सब ढकोसले बंध करो,
क्यों की ये सब हमारे देश की रिवाज नहीं
मा, प्रेम ,नारी किसी दिबस की मोहताज़ नहीं |||||