अंतरिम यात्रा ...
जाने कितनी ही यात्राएं की होंगी
पहले किन किन रूपों में
आज भी
एक और यात्रा में हैं
मनुज का चोगा पहने हुए
यह यात्रा -
इस मानव रूप में
है एक अंतरिम यात्रा
शायद नहीं रुकेगा
यह सिलसिला यहीं अब
फ़िर निकल पड़ेगी
यह रूह पहने ना जाने
कौन सा चोगा
ना पीछे की यात्रा का
कुछ याद है
और ना अगली यात्रा का
कुछ भान है
शायद बस चलते जाना है
बस चलते जाना है
अनंत काल के लिए
समय की सीमाओं से परे
:- भुवन पांडे
#अंतरिम