मित्र मेरा जैसे इत्र ,
बिना पूजा के भी पवित्र ,
उसके नहीं आते अच्छे चित्र ,
उसको पसंद हे घटिया चलचित्र ,
कभी वो बहोत शोर मचाए ,
कभी रहता हे चुप चाप ,
कभी मुझे गाली देता हे,
कभी ....नहीं कहता, पहले आप ,
मेरे हर दुःख में पहले आता ,
सुख में भी वो आता - जाता ,
कही कभी जो में फास जाऊं ,
बहार निकाले और चिल्लाता ,
वो स्कूल की पूरानी बेंचिस ,
वो मेरी टूटी सी पेंसिल ,
वो मेरा पहला अफेयर ,
वो मेरी माँ की केयर ,
सब में वो था हिस्सेदार ,
मेरे मन का चौकीदार ,
वो कपड़ो की हेरा फेरी ,
वो घर जाने में हुई देरी ,
एक दूसरे का सच छुपाते
हम घर पर भी जूठ बताते ,
उसने लिखा वो पहला लेटर,
अभीभी मेरे पास हे बेटर
जिंदगी के साथ भी ,जिंदगी के बाद भी ,
उसपे ये उसने लिखा हे मेटर ,
वो हमारे सिल्ली झग़डे ,
वो हमारी लम्बी बातें,
हमारी दोस्ती कभी ना बिगड़े ,
आये जाये कितनी बरसाते !!