माँ
माँ - हर लड़के की पहली गर्ल फ़्रेंड
हर लड़की की बेस्ट फ़्रेंड ।।
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“ माँ “
तुझसे ही संसार चला
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“ माँ “
यें ही है जो है भगवान के समान ,
उसकी ना कोई जाती है ना कोई धर्म
सिर्फ़ नाम और काम से ही थी उसकी पहचान ,
बस सिर्फ़ करती है वो एक ही काम
हर दिन खुदको भूलकर सबको खुश करने की है आदत,
जब-जब माँ कहकर आवाज़ लगायी
माँ सब काम छोड़कर दौड़ी चली आयीं।
वो सुध-भुद खोकर हर पल अपने बच्चों में जीती है
ये ही बनकर रह गई उसकी पहचान ।
हर वो चीज़ जो हमारे सामने होती
हमें नहीं दिखती
पर “माँ“ निकाल के देती है ।
जिस बच्चे के नाम से , काम से वो थकती नहीं थी
आज,
वो ही बच्चे उसका बोज़ उठाकर थक गए ।
शायद वो भूल गए ,
इस बच्चे को एक “माँ “ ही ९ महीने अपने कोख़ में पालती है ,
उसे चलना सिखाती है ,
ज़िंदगी में कभी रुकावट सी आती है ,
तो वो “माँ “ ही है जो रुकावट को दूर भागती है ,
हर मुसीबत से लढ़ना सिखाती ,
जब कभी जो हार महसूस हुई , वो “ माँ “ ही थी जिसके कंधे पे सर रख कर रोई ।
अपने औलाद के ख़ातिर पूरे जग से लढ़ जाति है ।
एक माँ ही है जो बनाती है बच्चों को आबाद,
लेकिन फिर भी जब बच्चे गलती करते है,
तो माँ ही बंजती है हर उस ग़लत काम की गुनहगार ।
“ माँ ने सिखाया होता तो आज ऐसा ना होता “
माँ को ही सहना होता है तिरस्कार !!
एक बच्चे के कामयाबी के शिखर का ताज होती है माँ ।
मेरे बिना कुछ कहे ही सब समझ जाती है ,
ऐसी मेरी “माँ” तुझे है सलाम ।
तू ख़ुश रहे हमेशा ऐसे ही है मेरी दुआ ।
Poetry by • Jill शाह •
HAPPY MOTHER’S DAY ❤️