बारिश की बूंद सी प्यारी तू
सुकी धरती सा प्यासा में
दुख की तपन में
खो चुका सुगन्ध में
आसमान को निहारता में
बादल की प्रतीक्षा करता में
हवा से संकेत पूछता में
इस तपन को सहता में
बारिश की बूंद सी प्यारी तू
सुकी धरती सा प्यासा में
हवा हाथ सिर पे फैर गई
तेरे आने का आशीष दे गई
बादल भी है आसमान में
पूरा करने हवा का आशीष
आसमान को निहारता में
तुझसे मिलने को तड़पता में
बादल का दामन छोड़
निकली तू मेरी ओर
तेरी। एक स्प्रश से
मिट गई सारी तपन
बारिश बूंद सी प्यारी तू
गीली धरती सा महकता में