(47) "मैंने देखा"
मैंने पहली बार देखा
आसमान का नीला होना
धूल जब धरा को गले लगाया
जल को नीले जल में मिल जाना
कुमुद जब भौवरें को डांट भगाया
मैंने पहली बार ही देखा
अपनों से दूरियां बनाना
ध्वनि को धमनियों से सुनना
शब्दों को खोह में खुस जाना
अकड़ को अपनी दुम हिलाना,
मैंने पहली बार देखा
खुद से बकरी सा मिमियाना
मकान के कोने में छिप जाना
खाना नही तो भूखे सो जाना
ख्याहिशों के दांता टूट जाना,
मैंने पहली बार देखा
अदालतों में ताला लग जाना
हादसों के पैर शून्य हो जाना
अपराधों की घंटी बज जाना
दौलत की भूख शांत हो जाना।
रचनाकार-शिव भरोस तिवारी 'हमदर्द'