उफ़! ये चहेरे का नूर ,चांदनी सा
मगर जूठी मुस्कान
उफ़! ये मृग नयन
मगर क्रोध से लाल
उफ़! ये लहराते केश
मगर अपमान से सर्प
उफ़!ये राजसभा
मगर अधर्म का प्रतीक
उफ़! ये शांति का शहर
मगर महाभारत से बाद का...! D
__ कहानी अपमानित देवी द्रोपदी की ,कहानी धर्मकी
#चाहेरा