Hindi Quote in Poem by Bhuwan Pande

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हवा बहती है
निर्बाध स्वच्छंद
और भरती है श्वास वायु
भीतर हमारे

नदिया बहती है
पर्वत से सागर तक
और जल से सींच कर
छाती धरा की
जीवनरस भरती है

मेघ भरकर जल वाष्प
उठते हैं , उड़ते हैं नभ में
और बरखा बन बरसते हैं
हरियाली बिखेर
शुष्क धरा पर

मिट्टी कितने ही
बीजों को सहेजे
अपने गर्भ में
जन्म देती है नव जीवन
के अंकुरों को

पर्वत खड़े हैं
समेटे हरियाली और
बहते जल धारे
श्वास भरते हुए
शीतल पवन भर अधरों से

नहीं हैं इनमें प्राण
पर प्राण भरते हैं ये
जग में जीवन भरते हैं ये

नतमस्तक हो आदर से
प्रणाम है उन सभी को
जो कि जुड़े हैं
जो कि खड़े हैं
जो कि लड़ें हैं
जो कि अड़े हैं

हवा, नदी, मेघ, मिट्टी और पहाड़ को

बचाने कि लिए
संजोने के लिए
सवांरने के लिए

:- भुवन पांडे

#आदर

Hindi Poem by Bhuwan Pande : 111420505
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