My Touching Poem...!!!
आज प्रभु ने भी क्या अजीब-सा अपना
रुप दिखाया की फटीं आँख देखते रहे
मज़बूर लाचार बेबसी से हर पल मौत
का ख़ौफ़ ज़हनी फ़िज़ा में बिखेरते रहे
आज मोहब्बत की महफिल में आपसी
गिले-शिकवे कुछ यूं नीलाम-से होते रहे
आज ख़ून के अलग-अलग रंग भी तो
एक ही लाल कलर में जैसे ढलते गए
कभी साक़ी तो कभी रक़ीब बनके जाम
जो पीते थे आज बूँद बूँद को तरसते रहे
आज हूकका बीड़ी सिगार गुटका खैनी
मिराज पान मसाला ख़्वाब से लगते रहे
वो अपनी एक-एक शायरीओ में अपने
अंदाज़-ए-हाले-ए-दिल बयां करते रहे
हर रुँह यह सुन कर उन्हें दाद भी देते रहे
और एक हम थे हालात के बन बुनते रहे
ऑंखो की पुतली भले ही काली हो पर
कल तक नजारा हर रंगीन हम देखते रहे
आज उसी ऑखो की पुतली के बताए
हर नज़ारे ख़ौफ़ज़दा ग़मज़दा लगते रहे
या रब अल्लाह ईश्वर प्रभु जो भी नाम
हो पर कर कृपा दयालु बंदे दुआ करते रहे
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