#आदर प्राप्त करने के लिए कर्म-जनित यश ही सर्वश्रेष्ठ होता है। आदर देते समय प्राणी अपने स्थान से विचलित होकर कोई न कोई शारीरिक क्रिया करता है।जैसे बैठा हुआ खड़ा होता है।वह ऐसा इसलिए करता है,क्योंकि आदरणीय को देखकर उसके प्राणों की स्थिति ऊपर उठने लगती है,प्राण गले को आने लगते हैं,अतः उन्हें संतुलित करने मनुष्य खड़ा हो जाता है। कर्मों का यश,ज्ञान,पद, बल,वस्त्र,रूप,अतिथि होना आदर के लिए पर्याप्त है।आदर देने से समस्त लोकों में कीर्ति फैलती है।
निरादर करने के परिणाम अवश्य मिलते हैं।