आदमी का शिष्ट व्यवहार
एक ऊपरी लिबास है
भीतर के मानस का
जिसे ओढ़े वो -
रहता है, चलता है
मिलता है, कहता है
शिष्टाचार -
एक सफ़ेद लिबास है
कोमल और साफ सुथरा
जो ढके रहता है
मानस के भीतर के सभी रंग
लाल, काले, गहरे, फीके
काश कि
इस लिबास के पार भी
देख पाता
अंतर मन के रंग सभी
:- भुवन पांडे
#शिष्ट