My Painful Poem ...!!!
कल तक शान से जीए Elegant जीदगीं
यारों आज पानीके बुलबुले-सी है जीदगीं
चौधार आंसू बहा मातम करती जीदगीं
लाशोकी पनाहकी जगह ढूँढतीं जीदगीं
बेमक़सद बेवजह लम्हे काटतीं जीदगीं
पल पल को सिसकती कराहती जीदगीं
बेबस बेसहारा बेहतर वक़्त ढूँढतीं जीदगीं
अपनों ही में परायापनको मारतीं जीदगीं
साँसोंकी आवनजावन तलाशती जीदगीं
उदास मायुष दहशतगर्द ग़मज़दा जीदगीं
ए रब मासुम बच्चों की फ़रियाद जीदगीं
ग़रीब-तवंगर बदहाल भूखीप्यासी जीदगीं
या रब तूं ही नाखुदा कश्ती का कहा कब
कैसे ख़त्म होगी,सुकून तराशतीं जीदगीं
घूँटनो के बल प्रभुसे गिड़गिड़ाती जीदगीं
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#Elegant