शीर्षक
#आनंद
तोता पाता मिर्ची में, कोयल पाता आम में,
नेता पाते सत्ता में, पीनेवाला जाम में।
कामचोर इसको पाता है, रहता जब आराम में,
शूर-वीर भी पाते हैं, जब घुसते हैं संग्राम में।
शिक्षक पाते शिक्षा में, बनिया पाता दाम में,
प्यासा पाता पानी में, कर्ता पाता काम में।
तुम पाती हो शोहरत में, मान, प्रतिष्ठा, नाम में,
मेरा प्रेमी मन पाता है, तेरे संग एक शाम में।।
लघु कविता
- रोहित मिश्रा