आज की नारी
आसान नहीं होता आज की नारी बनना
क्योंकि उसे पसंद नहीं होती जी हुजूरी,
बनाती नहीं वो कभी रिश्ते
जब तक न हो उनमे
प्रेम और समर्पण की भावना |
नहीं जानती स्वार्थ की चाशनी में डुबोकर
अपनी बात मनवाना,
वो तो जानती है सच्चाई से
सच कह जाना।
कभी जो बोली नम्रता से
तो आपका उसे बेवकूफ़ समझ जाना |
फ़िज़ूल की बहस में पड़ना
उसकी आदतों में शुमार नहीं,
वो जानती है तर्क के साथ अपनी बात रखना।
वो क्षण-क्षण गहने- कपड़ों की माँग
नहीं किया करती,
वो तो सँवारती है स्वयं
अपने आत्मविश्वास से,
निखारती है अपना व्यक्तित्व
मासूमियत भरी मुस्कान से |
बखूबी घर संभालना आता उसे
अपने सपनो को पर देना भी आता |
अभिमान के आगे वो नतमस्तक नहीं होती,
झुकती है तो तुम्हारे निःस्वार्थ प्रेम के आगे।
हौसला हो निभाने का तभी रिश्ता बनाना
उसकी ज़िन्दगी मे आना, उसे सॅवरना |
न समझना उसे कमजोर , न ही वो अबला है
वो शक्ति है, समर्पण , त्याग और सबला है.
------Swati
# kavyostav2
विषय... भावनाप्रधान