सूरज से दोस्ती का इरादा किया हमने
सुबह 5 बजे उथने का वादा किया हमने
सुन कर हंस दिए सारे दोस्त-व-अहबाब
बिस्तर ने देख कर कहा अभी रहने दो जनाब
अब तो बर्दाशत की हद पार हो गई
जब चाँद भी मेरे ख़िलाफ़ हो गई
कहा लॉकडाउन के मौसम मै दोस्ती का खयाल नाकर
बोहोत वक़्त मिलेगा थोडा दोपहर में याद कर