मेरे वजूद की तलाश में तु खुद को यु इस तरह भटकने मत दे,
क्योंकि मेरा ही तो वजूद तेरे ही अंदर, तेरे ही रुह में कही ना कही तो समाया हुआ है,
कभी देख खुद की अंदर, और मेहसुस कर अपनी रुह को, तुझे मेरी ही रुह मेहसूस होगी,
अगर ना हुई तो मिटा दे,
मुझे,और रिहा कर दे,
मेरी रुह को,तेरी रुह से और तेरे ही वजूद से ताकि खुद को रुखसत कर सकु, अपने ही शरीर से
सुकुन से
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केशर कुंज