My Comparison Poem...!!!
यारों दो लिटी इश्क़ ओर कोरोना पर.!!
ना कोई आश है ना प्रकाश है
ना कोई इलाज है ना दवाई है
ना कोई इलाज है ना दवाई है
ए इश्क़...!!!
आज तेरे टक्करकी एक बला आई है
आज इन्सानी नस्लों की सामंत आई है
तूं तो फिर भी घूँट घूँट कर जीने देता है
पर ज़ालिम यह कोरोना तो घूँटने तक
की भी मोहलत किसी बंदे को नहीं देता
जानें बंदा इसे उससे पहले जान ले लेता
चँद दीन में काम अपना तमाम कर देता
फिर अगले शिकार की ओर चल देता
ए इश्क़...!!!
तेरा काटा पागल माँगे दिदार-ए-यार
इसका काटा तड़पें है बेचारा लगातार
तेरा काटा मर के भी फ़सानों में अमर
इसका काटा ना नाम है ना निशान-भर
काश प्रभु करे कोई तो इलाज नसीब हो
ताकि जहाँ के महान विलनका विध्वंस हो
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#Bright