अंधेरा घना है रात काली है
चलो कही चिराग़ जलाए
वो सोया होगा आस में
की कोई आएगा इस रात में
अब ना अंधेरा और रहेगा
अब ना पेट यू शोर करेगा
रोटी-बियारी साथ करेंगे
काली सी इस रात में
आओ मिल के चिराग़ जलाए
काली सी इस रात में
बच्चे सब थे छुपे हुए की
गुम ना जाए रात में
चलो हाथ फेर के याद दिलाए
हम सब है तेरे साथ में ।
आओ मिल के चिराग़ जलाए
काली सी इस रात में
-शुभम त्रिपाठी