सुदंर कविता ..
विषय .किन्नर की व्यथा ...
किन्नर भी ईश्वर की अद्भुत कृति है।
किन्नर बिन बुलाये मेहमान की तरह शादी व जन्मदिन पर बधाई देने आते हैं ।।
इनके आशिष कभी निस्फल नही जाते हैं ।
इनको खुश करना ईश्वर को खुश करने के बराबर हैं ।।
इनको कभी अपने दरवाजे से निराश कर नही लौटाना चाहिए ।
ये भी हमारे समाज के अभिन्न अंग हैं ,उनकी उपेक्षा न करें ।।
ये हर समय खुश व हंसते रहते है ,ताली बजाकर
गा कर आशिष दे जाते हैं ।
समाज को अपनी सोच बदलनी ही चाहिए ।।
किन्नर ने पहलीबार श्रीकृष्ण के जन्म की बधाई दी थी ।
तभी से यह हमेशा खुशि के मौके पर बधाई देने आ जाते हैं ।।
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