शिकायत हमको थी उनसे, सबब क्या उनकी उलझन का
मुनासिब हो तो बतलाना, ये उलझन जल्द सुलझाऊं
ख़ता गर हो कोई मुझसे, बेझिझक मुझसे कह देना
मिटा दूंगा उस वजह को ,वजह मैं हूं तो कह देना
नहीं कुछ स्वार्थ होता है, सच्चे प्रेमी की चाहत में
न कह पाई अगर मुझसे ,तो बतलाना मुझे ख़त में
है उज्ज्वल प्रीत की धारा ,ये कलुषित हो नहीं सकती
धवल हो हृदय जिनके पास ,सफल वो प्रीति की बस्ती
मिटा संशय है गर तेरा ,समझ तू प्रणय आवेदन
मै समझूंगा हुआ काबिल, सुलझ गई तेरी वो उलझन
#उज्ज्वल