#रामायण
यही रात अंतिम .. यही रात भारी
बस एक रात की अब कहानी है सारी ..
नहीं बन्धु बांधव न कोई सहायक
अकेला है लंका में लंका का नायक ..
सभी रत्न बहुमूल्य रण में गंवाए
दशानन इसी सोच में जागता है
लगे घाव ऐसे की भर भी न पाए ..
ये बाज़ी अभी तक न जीती ना हारी
#Azad