40 अप्रैल के पीछे की कहानी...
बेशक 40 अप्रैल वाली घटना एक मानवीय भूल है और ज़ुबान की फिसलन के सिवा कुछ भी नहीं लेकिन इसे महज एक संयोग न समझा जाय। बुद्धजीवी नक्षत्रविज्ञान के अनुभवी और अंकशास्त्र के ज्ञाता ये कहते हैं कि जैसा कि 40 अप्रैल का ज़िक्र किसी भी शास्त्र में नहीं मिलता है अतः 40 अप्रैल नामुमकिन ही नहीं असंभव है उसी तरह लॉकडाउन (आपातकाल) भी अनिश्चित काल के लिए हो सकता है जैसा कि सर्बिया में हुआ। अगर आपातकाल नहीं भी लागू हुआ तो लगभग वैसी ही स्थिति रह सकती है।
यह कह कर जमूरे ने खेल देखने वाले लोगों से आटा, दाल, खुराक का सवाल किया और अपना तम्बू समेट कर चल दिया...
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