सुदंर रचना अपनी कलम से ...
भारत में किसान नंगा भुखा ,कैसे बने महान ।
खाने को रोटी नही ,पहनने को परिधान ।
फीस कहां से लाउं बेटा ,पास मे ना कोई दाम ।
बेटा मैं अनाथ पिता ,कहां से पुरे करूं अरमान ।
रात दिन मेहनत करूं ,तो एक फुटी कोडी ना मिले ।
अच्छा धर ,अच्छी स्कुल के सपने कहां से सजाऊं ।
मैं तो गरीब किसान ,राष्ट्र भाग्य विधाता कहलाऊं ।
पास मे फुटी कोडी नही पर ऊंचे नाम कमाऊं ।
छोड दे अपनी पढाई तु ,अपने भाग्य मे कहां ।
मानो सरस्वती ,लक्ष्मी रुठी है अपने अगंना ।
बेटा यहां धनवानो का बोलबाला ।
गरीब का कोई ना संगी साथी ,राम करे रखवाला ।
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