समय से लड़ाई है अपनी
जो हम लड़ रहे हैं, लड़ाई ना सिर्फ इस वक़्त बल्कि लड़ाई तो कोई ना कोई हमेशा लड़नी पड़ती है, कभी अपने मान के लिए,तो कभी स्वाभिमान के लिए, कभी अपने हक़ के लिए, तो कभी अपनी खुशियों को पाने के लिए, कभी खामोशी से चीखते हुए लड़ते हैं, तो कभी शब्दों का सहारा लेकर लड़ते हैं, कभी लड़ाई होती है अपने आंसुओ से, जो हमारी मुस्कान छीनने की कोशिश करते हैं, कभी लड़ते हैं अपनी हंसी से जो कभी कभी आने में इतनी देर कर लेती है, कभी लड़ते हैं समाज से, जो वक़्त पर परवाह हमारी कभी नहीं करती है, तो कभी लड़ते हैं खुद से और आखिरी वक्त में लड़ते हैं मौत से जो आने के लिए बेकरार रहती है, कुछ पल और ठहर जाए ज़िन्दगी, यहां यह इच्छा इंसान की रहती है, लड़ाई तो आखिरी वक़्त तक चलती रहती है, इसी लड़ाई के सहारे ज़िन्दगी इंसान की निकलती है।