जब जब तुझे नृत्य करते देखती हूं,
मन भाव विभोर हो जाता है,
ये कोनसा भाव है कान्हा
जब जब तुझे माखन खाते देखती हूं,
मन तृप्त हो जाता है,
ये कोनसा भाव है कान्हा
जब जब तुझे बंसी बजाते देखती हूं,
मन खुशी से नाच उठता है
ये कोनसा भाव है कान्हा
जब जब तुझे गैया चरते देखती हूं,
मन संतुष्ट हो जाता है,
ये कोनसा भाव है कान्हा
जब जब तेरा नाम लेती हूं,
मन कृष्णमय हो जाता है,
ये कोनसा भाव है कान्हा
- किंजल पटेल (किरा)
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