#अतीत
"अतीत के सायेसे लिपट रहा हूं,
न जाने किस दौरसे गुज़र रहा हूं,
आंखों मे सैलाब, सांसोमे तूफान
जिस्मानी तआल्लुक से छूट रहा हूं,
अंधा कुंआ है या है गहरी खाई,
संभलकर चलूभी तो फिसल रहा हूं,
उफ़ ये चीखें, शोर ये आवाजें,
गुब्बारसा जैसे फट रहा हूं,
मरा नहीं है अपना कोई फिर भी
रुदालियों सा मालाल कर रहा हूं,
न जाने किस दौरसे गुज़र रहा हूं,
अतीत के सायेसे लिपट रहा हूं......."
-mitesh